Friday, September 26, 2008


Friday, September 26, 2008
This week we had a poetry competetion, in our office... And it was fun in a way... though I could not come up with a decent entry..... but nonetheless this is what I could come up with....

तेरे आने की आस है, तुझे पाने की प्यास है
तू रहेती हर वक़्त मेरे ज़हन मैं है 
मधहोश हर वक़्त तेरे ही ख्यालों मैं हम
तू जा चुकी बोहत दूर है 
इस कम्भाकत दिल को कौन समझाए,
जो धधाकता हर वक़्त तेरी ही याद मैं है
की ना अब तेरे आने की आस है,
ना तुझे पाने की प्यास है|

thanks to google transliteration for the hindi text....

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